Thursday, 26 November 2020
Wednesday, 25 November 2020
Wednesday, 11 November 2020
लोकतंत्र अपनी तरह से अपमानित और लांछित हो रहा है
इस बार आशा थी कि कुछ अलग होगा| एग्जिट पोल ने भी इशारा किया था| मैंने तो यहाँ तक सोच लिया था कि इस बार ईवीएम की जय जयकार होगी| विपक्ष फिर से खुश होगा| भाजपा के देश निकाले जाने के खबर आएँगे| उत्साहित विपक्ष के कार्यकर्ता, फेसबुक से लेकर नोटबुक तक, लोकतंत्र की महिमा गाएंगे| बिहार के लोग अनपढ़ और रूढ़िवादी होने से बच जाएँगे| प्रबुद्ध और बुद्धिमान की कसौटी पर खरा मान लिया जाएगा उन्हें| लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ| इस तरह नहीं हुआ कि एक प्रशंसक ने पूरी जनता के विषय में यह निर्णय सुना दिया कि बिहार के लोग ब्राह्मणवाद के चंगुल से बाहर नहीं निकलना चाहते|
लोकतंत्र अपनी तरह से अपमानित और लांछित हो रहा है| विपक्ष के वे बीर जो फेसबुक से लेकर नोटबुक तक बैठाए गए थे, अब आक्रामक मुद्रा में आ गये हैं| निश्चित ही एक दो क्रांति हो जाए तो कोई आशंका नहीं| यह क्रांतियाँ निहायत जातिवादी और सांप्रदायिक होंगी दो राय इसमें भी नहीं है| सबसे बड़ी बात ऐसा उनके द्वारा होगा जो देश में सांप्रदायिक सद्भाव चाहते हैं और समाज में जातिवादी प्रवृत्तियों का अंत|
Wednesday, 4 November 2020
मुनौव्वर राणा जैसे लोग विष हैं समाज के लिए
मुनौव्वर राणा जितना बोल दिए उससे अलग उनका मिज़ाज कभी नहीं रहा| आज कैसे हो सकता था या हो सकता है| यह सिर्फ मुनौव्वर राणा की बात नहीं है यह लगभग मुस्लिम कवियों की कमजोरी है कि वह इस्लाम धर्म आई जड़ता पर बोलने से डरते हैं, घबड़ाते हैं| यदि यह कहें कि इस्लाम धर्म में आई रूढ़ियों को ओढ़ते-बिछाते हैं तो इसे अन्यथा न लिया जाए अपितु एक सच मानकर स्वीकार किया जाए|
हिंदी के कवि या चिंतकों की विश्वसनीयता हर समय शक के दायरे में रही है| सिर काटने की बात हो या धमकी देने की आदत, इनका समर्थन प्रगतिशीलता के आड़ में हिंदी कवियों द्वारा हर समय किया गया है| एक सम्प्रदाय मात्र के लोगों से आप प्रगतिशीलता की अपेक्षा बिलकुल नहीं कर सकते हैं| हिन्दू धर्म की तमाम मान्यताओं पर दिन रात गलत कमेन्ट करने वाले दूसरे धर्म की गलत मान्यताओं पर इतना मौन साध लेते हैं जैसे कुछ दिक्कत ही नहीं है| दिक्कत कहीं भले न हो लेकिन आपकी विश्वसनीयता पर है| हो सके तो उसे बचाइये|
अर्नब गोस्वामी के साथ गलत कर रही महाराष्ट्र सरकार
सत्ता को सिर्फ सत्ता की दृष्टि से देखिये| दूसरे का घर जलते हुए स्वयं को सुरक्षित रखने का स्वप्न संजोने वाले कहीं गहरे अंधकार में गिरते हैं| अर्नब गोस्वामी के साथ महाराष्ट्र सरकार जो कुछ भी कर रही है गलत है| मीडिया की स्वतन्त्रता पर सीधे तौर पर हस्तक्षेप है| मीडिया समूहों को इस स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए|
जश्न मना रहे हैं कल मीडिया समूहों की दुरगति पर जब रुदनगान करें, वह भी देखने लायक होगा| हम सही सबको गलत ठहराने की नीति बिलकुल उचित नहीं है|